My tryst with poetry – Hindi

On Sushma Swaraj’s death

जी चाहता है फिर वो मंजर देखूं
स्वराज का उमड़ता समंदर देखूं
मुस्कुराता चेहरा और आंखों में दृढ़ निश्चय
हो सके तो अपने भी अंदर देखूं।

#RIPSushmaSwaraj
#inspiration

On Article 370 in Kashmir

For years someone was treated as a “child with special need”, put in a special school and served with special feed. Some taunted him for being a liability, while others showed him only pity. Some tried taking advantage of him, just when the situation was grim.

That child is brought back to the mother, to be treated like no other.

#article370

On Self motivation

उस शहर का चरित्र मैं क्या जानूं
जिसकी चर्चा में मेरा नाम नहीं।
उसकी आदत है मुझे भूल जाने की मगर
मेरे बिना भी उसका कोई काम नहीं।
सुने कि चर्चा से ही चरित्र चरितार्थ है
शहर सोता तो है, पर उसे आराम नहीं।

On Entrepreneurship

आजाद पंछियों की ज़मात के लिए
एक जाम नई शुरुआत के लिए
पर फैला लो कि आसमा छूना है
अफसोस बहुत है पिंजरे की औकात के लिए।
#entrepreneurship #startups

On conditions of news channels

गरमा गरम भड़काऊ स्वनिर्मित हालात लाया हूं
दुनिया बदली तो क्या, सदियों पुराने सवालात लाया हूं
मसीहा हूं तुम्हारा, जेब से चवन्नी निकालो
में खरीदने को तुम्हारे, अपनी औकात लाया हूं।

#news #media

On my son being mamma’s boy

इतनी सी कहानी है
ना राजा है ना रानी है
हर सदी की सुनी जबानी है
इक नन्ही चिड़िया भूखी थी
घर में रोटी सूखी थी
जो रस लाया स्वाद भरा
वो मां की आंख का पानी है ।

#makaladla

On missing my wife

ना खाने का होश ना पहनने का सलीका
ना बुद्धि से यारी ना जीने का तरीका
तू है, तो इंसा सी सीरत है मेरी
वरना दुनिया ये कहती नमूना कहीं का।

शहर सूना सा लगता है 
दिन दूना सा लगता है
आकर देख कि तेरा ये हसीन शौहर
तुझ बिन नमूना सा लगता है।

On politics in India

कमाई तो बहुत फिर भी उदासी हरदम छाई है
कुछ बीजेपी ले जाती है कुछ कांग्रेस उड़ाती है
गरीबों का बहाना है
घर अपना बसाना है
किया जन्नत का है वादा
करनी, जहन्नुम जाती है।

On blame game in politics

ये मुमकिन नहीं कि तू ये बंजर छुपा ले
जो सब देख चुके हैं, वो मंजर छुपा ले
चीख चीख कर मुझे कातिल कहने वाले
इतना तो कर कि अपना खंजर छुपा ले।

कहने को तो चंद घाव हैं मरहम लगाने को मगर
तेरी हथेली इतनी नहीं कि ये समंदर छिपा ले।

Random gyan

मैं और मेरी लड़ाई में, मैं हार गया
मैं ही जीता पर मेरा अहंकार गया
मैं रोक सकता था मुझे पर मैं देखता रहा
मेरा मुझको समझाना बेकार गया।

On Elections in India

मैं चौकी और तू मेरा चौकीदार सैयां
आंख मूंद के रहना होशियार सैयां

मैं चौकी……

बैंक बचा के रखना भईया लुट ना जाए लॉकर 
पीछे नीरव और माल्या, हाथ पड़े हैं धोकर
रखना हाथ में डंडा मोटा, तुम तैयार सैंया
देखो बन ना जाए चोरों की सरकार सैंया

आंख मूंद के रहना होशियार सैंया
ओ चौकीदार सैंया…

विकास की मैय्या रही कुंवारी, मर गई बुड्ढी होकर
बैठें बार हटाएं गरीबी, हाथ में जानी वॉकर
बनवा देंगे वहीं पे मंदिर, फिर इस बार सैंया
वरना चलवा देंगे खानदानी कारोबार सैंया

आंख मूंद के रहना होशियार सैंया
ओ चौकीदार सैंया….

गठबंधन का राग अलापे सर्कस के सब जोकर
कौन बनेगा राजा भईया कौन बनेगा नौकर
राहुल फेल जो हुआ फिर इस बार सैंया
हर सूबे में है पी एम् एक तैयार सैयां

आंख मूंद के रहना होशियार सैंया
ओ चौकीदार सैंया….

On living healthy life

हसरत से देखा हसरत को, तो हसरत पूरी हुई
ज़िन्दगी से लगी थी जीने की वो शरत पूरी हुई
उम्र भर जाने कहां पेलते रहे दंड,
आज हवाओं से लड़े तो कसरत पूरी हुई।

On Statue of Unity

वर्षों की मेहनत से साकार बनता है
जो उपयुक्त हो वो आकार बनता है
होंगे कई बुत आसमान छूने वाले मगर,
मिट्टी में खून मिले तो सरदार बनता है।

#Statueofunity #Sardar

On loan waivers by various governments

हे नाथ, तुम कीचड़ में कमल हो
निडर, अशोक और अटल हो
छत्तीस लोक के स्वामी
तुम भूपेश धरा अचल हो।

प्रभु है इतनी सी विनती
मुझ निर्धन का उद्धार करो
बस तीन लोक से क्या होगा
हर सूबे में अवतार धरो

मैं कर का दाता, मध्य वर्ग
मेरा भी इंसाफ करो
घर, वाहन का बाकी है
सारा कर्जा माफ करो।

For my Son

उसी की मर्जी है कि ये मुमकिन हुआ 

कि सबने आसमां को जमीं में समाते देखा। 

कौन कहता है कि वो सिर्फ मंदिरों में मिलता है

मैंने उसे अपनी गोद में मुस्कुराते देखा ।

For My Daughter

मुश्किलें इस क़दर आईं , कि जीना आसान कर गईं.
खुशियां इतनी मिलीं, मुझे परेशान कर गईं.
उम्र गुज़र गई सारी, कोशिश में इंसान बनने की
वो मेरी गोद में आकर मुझे भगवान कर गई.

मुझे क्या लेना ऊपर वाले से,
मैं अपना खुदा खुद आप हूं.
बस यही पहचान काफी है मेरी, 
कि मैं अपनी बेटी का बाप हूं.

Random gyan

खता जिसकी थी वो खुद बेहद खफा है
अजीब नजारा देखा इस दफा है
वक्त है सुधर जाओ मुहब्बत करने वालों 
फ़िर न कहना कि सोनम गुप्ता बेवफा है.

Random Gyan

आँसुओं को बहने दो
मत रोको मुझे आज कुछ कहने दो
तेरी मुहब्बत की निशानी समझ के रख लूँगा
ख़ंज़र जो मारा है पीठ पर, उसे वहीँ रहने दो.
जख्म गहरा है ताउम्र तकलीफ देगा 
तजुर्बा है जिंदगी का, मुझे हँस के सहने दो.

Commentary on current situations

रुपये हज़ार हो गए
पहिये दो से चार हो गए
दिल छोटे और बड़े घरबार हो गए
अपनों के आंसू न पोंछ सके मगर
हम कितने लाचार हो गए

भड़काऊ समाचार हो गए
गुंडों के प्रचार हो गए
बिकाऊ सारे विचार हो गए
समझ के भी न समझ सके
हम कितने लाचार हो गए

रिश्तों के व्यापार हो गए
बेटियों के बलात्कार हो गए
एक नहीं कई बार हो गए
चाहकर भी न रोक सके
हम कितने लाचार हो गए

मुजरिम सारे सरकार हो गए
जो कातिल थे, थानेदार हो गए
और डॉक्टर सारे बीमार हो गए
आँखे मूँद लेते हैं तमाशा देखकर
हम कितने लाचार हो गए.

For Chandra shekher Azad

क्रान्तिकारियों के संघर्ष की याद हूँ 
सीने पे खायी गोलियों का स्वाद हूँ
जो नहीँ जानते, या भूल गये हैं सुन लें
मैं जीते जी भी था और मर के भी आज़ाद हूँ

Random Gyan

आस्मां से उतर कर जमीं से मिल आया 
आज मौका मिला तो खुदी से मिल आया
समुद्र हूँ, रुद्र हूँ और घमंडी भी मगर
प्यास लगी तो पहाडी नदी से मिल आया

राज कर रहे दुशासन हर शहर में 
मैं डरी सहमी द्रौपदी से मिल आया 
और वो लोग भी सुन लें जो भविष्य बताते हैं
कुछ नहीँ बदला वहाँ मैं अगली सदी से मिल आया.

Random Gyan

मेरे आँसू तेरी शराब 
काम एक ही है 
मेरी रोटी तेरा कबाब
दाम एक ही है
जुदा है मकसद और तरीका मगर
मेरे सपने तेरा ख्वाब
नाम एक ही है.

More Random gyan

बेबात तमाशा है
महबूब का झांसा है
आजादी के आशिक को
ख्वाइशों ने फाँसा है ।

बचपन रुआँसा है
यौवन प्यासा है
जीने की चाहत में 
बुढ़ापा मरा सा है ।

बंजर हरा सा है
समंदर ज़रा सा है
सच में मिलावट है
झूट खरा सा है ।

बारिश की आशा है
खेत सूखा सा है
दुनिया का पालक वो
खुद भूखा सा है ।

On Congress protesting for democracy

भ्रष्टाचार के पान पर घोटालों का चूना और
एमर्जेन्सी कत्था हो गयी है 
कातिल चीख चीख कर कह रहे हैं
की लोकतंत्र की हत्या हो गयी है.